जालंधर फोकल प्वाइंट के शौचालय में बिना रसीद वसूली पर उठे सवाल, आखिर किसके आदेश पर लिया जा रहा पैसा?

जालंधर (संजीव कुमार) जालंधर के फोकल प्वाइंट स्थित शौचालय में लोगों से कथित तौर पर बिना किसी लिखित पर्ची या रसीद के पैसे वसूल किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि शौचालय के इंचार्ज हरविंदर द्वारा स्वयं लोगों से पैसे लिए जा रहे हैं।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शौचालय की सुविधा के लिए कोई अधिकृत शुल्क निर्धारित किया गया है, तो लोगों को रसीद या लिखित पर्ची क्यों नहीं दी जा रही? एक दिन में कितने लोगों से कितनी राशि वसूल की जाती है और उस राशि का रिकॉर्ड कहां दर्ज किया जाता है—इसका भी कोई स्पष्ट हिसाब सामने नहीं आया है।
बताया जा रहा है कि जब इंचार्ज हरविंदर से पैसे लेने के संबंध में सवाल किया गया तो उनके द्वारा कहा गया कि यह पैसा “ऊपर जमा करवाना होता है।” लेकिन सवाल यह है कि जब लोगों से पैसा लेते समय कोई रसीद अथवा लिखित रिकॉर्ड ही नहीं बनाया जा रहा, तो फिर ऊपर जमा होने वाली राशि का हिसाब किस आधार पर तैयार किया जाता है?
इस मामले को लेकर जब चेयरमैन आर एन झा से बातचीत की गई तो उनसे पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब मांगा गया। उन्हें यह भी कहा गया कि कृपया अपना पक्ष लिखित रूप में भेज दें, ताकि खबर में उनका पक्ष भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जा सके। लेकिन खबर तैयार होने तक चेयरमैन की ओर से कोई लिखित जवाब प्राप्त नहीं हुआ।
बिना रसीद वसूली तो फिर हिसाब कैसे?
मामले में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं—
क्या बिना रसीद लोगों से पैसा लेना नियमों के अनुसार है?
एक दिन में कुल कितनी राशि एकत्र होती है?
उस राशि को किसके पास जमा करवाया जाता है?
क्या उसका कोई लिखित रिकॉर्ड तैयार होता है?
और यदि रिकॉर्ड तैयार होता है तो वह रिकॉर्ड कहां है?
यदि शौचालय के लिए कोई अधिकृत शुल्क निर्धारित है तो संबंधित विभाग को शुल्क की दर, वसूली की प्रक्रिया और जमा होने वाली राशि का पूरा हिसाब सार्वजनिक एवं स्पष्ट करना चाहिए।
मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि लोगों से वसूली जा रही राशि अधिकृत शुल्क है या नहीं और यदि है तो उसकी रसीद क्यों नहीं दी जा रही।













